मानपुर के भर्रीटोला पंचायत में लाखों का महा-फर्जीवाड़ा! सरपंच के दस्तखत के बिना पास हुए बिल; एक ही बिल से दो-दो बार निकाला पैसा, खातों का खेल उजागर

मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी [22 मई 2026] | मानपुर विकासखंड के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत भर्रीटोला में जनता के पैसों (सार्वजनिक धन) के बंदरबांट और नियमों को ताक पर रखने का एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है. ‘ई-ग्राम स्वराज पोर्टल’ के सार्वजनिक दस्तावेजों के आधार पर ‘संदेश छत्तीसगढ़’ की खोजी टीम द्वारा किए गए एक बड़े वित्तीय ऑडिट में यह खुलासा हुआ है. पंचायत में प्रशासनिक और वित्तीय नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए लाखों रुपयों का भुगतान कर दिया गया. सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इन संदिग्ध बिलों पर ग्राम पंचायत के सरपंच के हस्ताक्षर ही गायब हैं.
पत्रकारिता की शुचिता और निष्पक्षता का पालन करते हुए हमारे संपादकीय विभाग ने इस समाचार के प्रकाशन से पूर्व संबंधित पंचायत सचिव को ‘प्रेस इंक्वायरी’ भेजकर उनका पक्ष मांगा है. आइए सिलसिलेवार ढंग से समझते हैं कि इस पूरे मामले में वो कौन से 4 बड़े बिंदु हैं जो सीधे तौर पर एक सुनियोजित वित्तीय घोटाले की ओर इशारा करते हैं:
1. सरपंच के हस्ताक्षर के बिना कैसे पास हो गए लाखों के बिल?
पंचायती राज नियमों के अनुसार, पंचायत में किसी भी निर्माण कार्य या सामग्री खरीदी के बिल पर सरपंच और सचिव दोनों के संयुक्त हस्ताक्षर और वित्तीय अनुमोदन (भौतिक या डिजिटल) होना अनिवार्य है. लेकिन भर्रीटोला पंचायत के रिकॉर्ड में मौजूद कई संदिग्ध वाउचरों पर सरपंच के दस्तखत पूरी तरह से नदारद हैं. केवल सचिव के एकल हस्ताक्षर के भरोसे वेंडर्स को लाखों रुपये का भुगतान ट्रांसफर कर दिया गया, जो प्रशासनिक मनमानी और वित्तीय नियमों का घोर उल्लंघन है.
2. ‘साहू कंस्ट्रक्शन’ के भुगतान में एक ही बिल का बार-बार उपयोग (डबल बिलिंग)
डेटा विश्लेषण में जो सबसे पुख्ता और गंभीर विसंगति मिली है, वह है ‘डबल बिलिंग’ (Double Billing) यानी एक ही बिल पर दो बार पैसा निकालना. पोर्टल के सार्वजनिक रिकॉर्ड्स से साफ हुआ है कि ‘साहू कंस्ट्रक्शन’ नामक फर्म को भुगतान करने के लिए एक ही भौतिक बिल का उपयोग बार-बार किया गया:
₹16,000 – ₹16,000 का दोहराव: ठीक इसी तरह की कार्यप्रणाली दिनांक 31 मार्च 2026 को भी देखने को मिली, जहाँ ₹16,000 के दो पृथक भुगतानों के लिए एक ही बिल प्रति का दोबारा अवैध उपयोग किया गया.


₹30,000 – ₹30,000 का खेल: दिनांक 24 दिसंबर 2025 को एक ही मूल बिल की प्रति का इस्तेमाल कर वाउचर नंबर 7 और वाउचर नंबर 8 से अलग-अलग दो बार राशि आहरित की गई. यानी एक ही बिल पर कुल ₹60,000/- निकाल लिए गए.

3. सप्लायर एक, बैंक खाते अनेक! खातों का संदेहास्पद खेल
वित्तीय शुचिता के नियमों के तहत किसी भी अधिकृत फर्म या वेंडर का एक ही रजिस्टर्ड खाता पंचायत के वेंडर प्रोफाइल में होना चाहिए. परंतु साहू कंस्ट्रक्शन को भुगतान करने के लिए पंचायत द्वारा रहस्यमय ढंग से दो अलग-अलग निजी बैंक खातों का उपयोग किया गया है:
- दिनांक 24 दिसंबर 2025 और 31 मार्च 2026 को किए गए सभी भुगतान बैंक खाता क्रमांक (अंतिम अंक 8896) में ट्रांसफर किए गए.
- वहीं, दिनांक 21 अगस्त 2025 को वाउचर नंबर 5 के माध्यम से की गई ₹49,000/- की एक बड़ी राशि का भुगतान किसी दूसरे ही बैंक खाता क्रमांक (अंतिम अंक 6959) में ट्रांसफर किया गया. एक ही वेंडर के लिए बार-बार बैंक खातों का यह बदलाव पूरी भुगतान प्रणाली को भारी संदेह के घेरे में खड़ा करता है.
4. ₹18.6 लाख की भारी-भरकम नकद निकासी और श्रद्धांजलि योजना में अपारदर्शिता
इन विसंगतियों के अलावा, ई-ग्राम स्वराज पोर्टल के अनुसार ग्राम पंचायत द्वारा विभिन्न चरणों में किस्तों के रूप में कुल ₹18,61,284/- (अठारह लाख साठ हजार से अधिक) की भारी राशि का नकद (Cash) आहरण किया गया है. सरकारी नियमों के मुताबिक इतनी बड़ी राशि का कैश लेन-देन बिना सक्षम प्राधिकारी (कलेक्टर या जिला पंचायत सीईओ) की लिखित अनुमति के नहीं किया जा सकता. इसके साथ ही ‘श्रद्धांजलि योजना’ के तहत किए गए खर्चों और फर्मों के चयन में भी पारदर्शिता का पूर्ण अभाव दिखाई दे रहा है.
इस बड़े खुलासे के बाद अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और कलेक्ट्रेट का पंचायत विंग इस मामले पर क्या संज्ञान लेता है और जांच की गाज किन-किन अधिकारियों पर गिरती है.