छुईखदान में ‘सुशासन’ के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा! 30 पंचायतों में एक ही वेंडर के सादे बिल, संचालक का कबूलनामा— ‘पैसा काटकर बाकी सचिवों को लौटाया’

छुईखदान (केसीजी) |

खैरागढ़-छुईखदान-गंडई (केसीजी) जिले के छुईखदान जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायतों में सरकारी राशि के गबन और संगठित फर्जीवाड़े का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। ‘सुशासन तिहार’ और प्रशासनिक शिविरों के नाम पर 25 से 30 ग्राम पंचायतों में एक ही टेंट व साउंड सर्विस संचालक के नाम पर एक साथ बिल लगाकर लाखों रुपये के शासकीय आहरण का गंभीर खेल उजागर हुआ है।

​न बिल बुक, न रिकॉर्ड: कंप्यूटर के सादे पर्चों से आहरण

​पड़ताल में सामने आया कि जिस वेंडर के नाम पर दर्जनों पंचायतों से 10 हजार, 12 हजार और 15 हजार रुपये जैसी राशियों के बिल पास कराए गए, उसके पास न तो कोई अधिकृत बिल बुक है और न ही किसी बिल की कार्बन कॉपी या रिकॉर्ड। वाणिज्यिक नियमों के तहत अनिवार्य जीएसटी नंबर और वैध बिल क्रमांक का इन पर्चों पर कोई उल्लेख नहीं है। सिर्फ कंप्यूटर से सादा प्रारूप प्रिंट करवाकर पंचायतों में बांटा गया और मनमाने आंकड़े भरकर सरकारी राशि निकाली गई।

​वेंडर का ऑन-रिकॉर्ड कबूलनामा

​पूरे मामले में संबंधित टेंट संचालक से सवाल किए जाने पर उसने ऑन-रिकॉर्ड स्वीकार किया:

​“मेरे पास कोई बिल बुक नहीं है, मैंने कंप्यूटर से फॉर्मेट छपवाकर सचिवों को दे दिया था। खाते में पूरा पैसा आने के बाद जितना मेरा वाजिब किराया बना, उतना मैंने काटा और बाकी पूरी रकम सचिवों को नकद वापस लौटा दी।”

​वेंडर का यह बयान सीधे तौर पर फर्जी बिलिंग के जरिए कमीशनखोरी और राशि बंदरबांट की कार्यप्रणाली की ओर इशारा करता है।

​एक साथ 30 पंचायतों में एक ही वेंडर: जनपद स्तर की भूमिका पर सवाल

​एक ही विकासखंड की 25 से 30 पंचायतों में एक ही समय पर एक ही वेंडर के बिना क्रमांक वाले सादे बिल लगना और भुगतान जारी हो जाना प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करता है:

  • ​जनपद स्तर पर ऑडिट और सत्यापन टीमों द्वारा बिना जीएसटी और बिना अधिकृत बिल बुक के इन पर्चों को स्वीकृति कैसे दी गई?
  • ​क्या पंचायतों को किसी खास वेंडर के नाम पर आहरण करने के मौखिक निर्देश थे?
  • ​वेंडर द्वारा सचिवों को लौटाई गई नकद राशि का नेटवर्क कहां तक जुड़ा है?

​अगले अंक में बड़ा खुलासा:

कौन है यह ‘खासमखास’ टेंट संचालक? किन-किन पंचायतों के सचिवों और सरपंचों ने इस फर्जीवाड़े पर मुहर लगाई और कितना हुआ कुल कमीशन का खेल? पूरी पड़ताल और फर्म के नाम का पर्दाफाश… अगले एपिसोड में!

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