​छत्तीसगढ़ आबकारी में नया ‘सिंडिकेट राज’! Innovsource कंपनी के VIP रोड दफ्तर पर उठे सवाल, बिना पद के कब्जा जमाए बैठे हैं घोटाले के संदिग्ध, भर्ती के नाम पर ₹1-1 लाख की अवैध वसूली ❓

रायपुर | 31 जुलाई 2026

छत्तीसगढ़ आबकारी विभाग में ईडी (ED), ईओडब्ल्यू (EOW) और एसीबी (ACB) की ताबड़तोड़ कार्रवाइयों के बावजूद शराब दुकानों के नाम पर अवैध सिंडिकेट चलाने का खेल रुकने का नाम नहीं ले रहा है। 1 अप्रैल 2026 से रायपुर, दुर्ग और बेमेतरा जिलों की शराब दुकानों के संचालन का जिम्मा संभालने वाली प्लेसमेंट एजेंसी इनोवसोर्स सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड (Innovsource Services Pvt. Ltd.) और उसके कारनामों पर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

​प्राप्त जानकारी के अनुसार, कंपनी द्वारा रायपुर के मौलश्री विहार, वीआईपी रोड (राम मंदिर के पीछे, मकान नंबर 21) स्थित कार्यालय से गतिविधियां संचालित की जा रही हैं, लेकिन इस कार्यालय का कोई वैध रजिस्ट्रेशन ही दर्ज नहीं है। आरोप है कि यह मकान ‘सर्ज फोर्थ टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड, चेन्नई’ के नाम पर किराए पर लेकर बिना किसी सत्यापन के अनधिकृत रूप से चलाया जा रहा है।

​पूर्व घोटाले से जुड़े संदिग्धों का कब्जा, पर्दे के पीछे से चल रहा नया सिंडिकेट!

​मामले में सबसे सनसनीखेज पहलू यह है कि इस दफ्तर में दो अनधिकृत व्यक्तियों—संस्कार सिंघानिया (पूर्व शराब घोटाले से जुड़े सिद्धार्थ सिंघानिया का भतीजा) और अंकुर पालीवाल का सीधा हस्तक्षेप और कब्जा है।❓

​सूत्रों का दावा है कि ये दोनों व्यक्ति कंपनी में किसी आधिकारिक पद पर नहीं हैं, फिर भी पूरे आबकारी तंत्र को अपने हिसाब से हांक रहे हैं। उल्लेखनीय है कि अंकुर पालीवाल को पूर्व में जांच एजेंसियों द्वारा नोटिस भी जारी किया जा चुका है।

​भर्ती में ₹1 लाख तक की वसूली, जबरन ओवररेटिंग का दबाव

​आरोप हैं कि इनोवसोर्स कार्यालय में बैठे ये रसूखदार शराब दुकानों में कर्मचारियों और सुपरवाइजरों की पोस्टिंग के एवज में प्रति कर्मचारी 1 लाख रुपये तक की अवैध वसूली कर रहे हैं। साथ ही, दुकानों पर पदस्थ सेल्समैनों पर एमआरपी (MRP) से अधिक कीमत पर शराब बेचने (ओवररेटिंग) का भारी दबाव बनाया जा रहा है। रायपुर जिला आबकारी अधिकारी द्वारा प्रारंभिक पूछताछ में भी अवैध वसूली की शिकायतों की पुष्टि होने की बात सामने आई है।

​फर्जी पुलिस वेरिफिकेशन से नौकरी हासिल करने का मामला, आबकारी अधिकारी भी मौन?

​कंपनी के जिला समन्वयक पर फर्जी पुलिस वेरिफिकेशन के जरिए नौकरी हासिल करने के गंभीर आरोप लगे हैं। मोवा-पंडरी थाना प्रभारी द्वारा लिखित में स्पष्ट किया गया है कि परितोष कश्यप का चरित्र प्रमाण पत्र थाने से जारी ही नहीं किया गया है और वह कूट रचित (फर्जी) है।

​थाने में शिकायत और एफआईआर के आश्वासन के बावजूद अब तक कार्रवाई न होना, और रायपुर जिला आबकारी अधिकारी डॉ. प्रवीण वर्मा द्वारा शिकायत के बाद भी चुप्पी साधे रखना, अधिकारियों और भ्रष्ट सिंडिकेट के बीच गहरी सांठगांठ की ओर इशारा कर रहा है।

​अधिकारियों का हटना और स्टेट हेड का इस्तीफा पड़ा संदिग्ध

​कंपनी के भीतर चल रहे इस फर्जीवाड़े के बीच हाल ही में इनोवसोर्स के जिला समन्वयक को अचानक हटाकर नए पद बनाए गए, जिसके तुरंत बाद कंपनी के राज्य प्रमुख (State Head) ने इस्तीफा दे दिया। सूत्रों के अनुसार, यह पूरी कवायद एक नई टीम तैयार कर अवैध वसूली और ओवररेटिंग के नए सिंडिकेट को स्थापित करने की साजिश है।

​हाल ही में अभनपुर शराब दुकान में डमी ग्राहक भेजकर ₹1800 की शराब ₹2000 में बेचने पर आबकारी उपनिरीक्षक पर निलंबन की गाज गिरी थी। इसके बावजूद इस तरह के बेखौफ सिंडिकेट का सक्रिय होना आबकारी विभाग की साख पर बड़ा तमाचा है। जागरूक नागरिकों ने मांग की है कि इनोवसोर्स कंपनी के कागजातों, फर्जी पुलिस वेरिफिकेशन और अवैध वसूली मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए।

“आबकारी विभाग के प्रभारी अधिकारी नीलाम्बित हो रहे हैं लेकिन उच्च अधिकारियों द्वारा कंपनी के ऊपर कार्यवाहि क्यों नहीं की जा रही है आखिर इनको किनका संरक्षण प्राप्त है इतने शिकायत के बावजुद भी अधिकारीयों के कान में जू तक न रेंगी”

​”इस संबंध में आबकारी विभाग और संबंधित ठेका कंपनी का पक्ष जानने का प्रयास किया जा रहा है, उनका पक्ष आते ही प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।”

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